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शनिवार

नहीं रहे ‘क्षणदा’ के प्रधान संपादक व कवि तारानन्दन तरुण


पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे तरुण जी ने अन्तिम विदा ले ली               (जन्म- 17 जनवरी 1935. निधन 22 जन.2011)। तारानन्दन तरुण विगत पचास वर्षों से साहित्य साधना में रत रहे। त्रिवेणीगंज जैसे ग्रामीण क्षेत्र में रह कर उन्होंने अनेक कठिनाइयों से जूझते हुए साहित्य सेवा की। उनके प्रकाशित पुस्तकों में - पत्र पुष्प, मुकुल, चाँद और अवनी, रेत के हासिए पर, आदि चर्चित हैं। उनके समग्र साहित्यिक अवदान, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर डा. दीनानाथ शरण द्वारा संपादित ‘साहित्य के मौन साधक भारती भूषण तारानन्दन तरुण’ उल्लेखनीय ग्रंथ है। 
       तरुण जी ने दीर्धकाल तक कोसी क्षेत्र से प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘क्षणदा’ का संपादन करते रहे। इनके निधन पर कौशिकी क्षेत्र साहित्य सम्मेलन, मधेपुरा के अध्यक्ष हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’, सचिव डा. भूपेन्द्र नारायण यादव मधेपुरी, पूर्व सांसद डा. रमेन्द्र कुमार यादव ‘रवि’ डा. विनय कुमार चैधरी, दशरथ सिंह, डा. शांति यादव आदि साहित्यकार-रचनाकारों नें शोक व्यक्त किया।