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मंगलवार

‘सोवियत रूस में चौदह दिन’ नहीं रहे इस पुस्तक के लेखक- शिवनेश्वरी प्रसाद !


धेपुरा के जाने-माने विधिवेत्ता, समाज सेवी एवं विद्वान शिवनेश्वरी प्रसाद (जन्म: 1.1.1927.) का निधन सोमवार 26.12.2011. को हो गया। वे लगभग साठ वर्षों से साहित्य, समाज, राजनीति एवं लोक कल्याण के कार्यों में सक्रिय रहे। वे ‘भारत-सोवियत सांस्कृतिक सहयोग समिति’- इस्कस के मधेपुरा इकाई के सचिव तथा प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था ‘कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ के संरक्षक भी थे  साथ ही दीर्धकाल तक मधेपुरा जिला न्यायालय में लोक अभियोजक भी रहे। उन्होंने अपनी सोवियत संध की यात्रा का विवरण अपनी पुस्तक ‘सोवियत रूस में चौदह दिन’ में लिखा। इसके अतिरिक्त ‘सामाजिक न्याय के अंतर्द्वंद’ तथा ‘न्यायालयों में आरक्षण के उठते सवाल’ विषयक ग्रंथ की भी रचना की। 
  हिन्दी साहित्य के संवर्द्धन को ध्यान मे रखते हुए उन्होंने न्यायालय का सारा कार्य आजन्म हिन्दी में ही किया। उनके निधन से मधेपुरा ने एक महान सामाजिक एवं सांस्कृतिक शख्सियत को खो दिया।

शनिवार

साहित्यिक विधाओं का विपुल संसार है ‘साँवली’ - डा. उत्तिमा केशरी

हिन्दी की साहित्यक लघु पत्रिकाओं में ‘सांवली’ अपनी प्रतिबद्धता, वैचारिकता और सर्जनात्मक प्रभावों से जानी जाती है। महज 3 वर्ष: 6 अंकांे के बदौलत बिना किसी फतवेबाजी और विमर्श के यह पत्रिका पाठकों के मध्य अपनी जगह बहुत तेजी से बना रही है। यह पत्रिका समर्थ रचनाकारों के अतिरिक्त अपने अंचल के साथ सुदूर नए लेखकों को स्पेस दे रही है। इस पत्रिका का प्रधान संपादक जवाहर किशोर प्रसाद बेहद इमानदारी और गहरी संलग्नता के साथ अपने संपादक त्रेय के माध्यम से संपादन कर रहे हैं यह प्रधान संपादक के कुशल नेतृत्व का परिचय है।
    इस अंक में कहानियाँ कई हैं, उनमें - डा. सरला अग्रवाल, रमेश कुमार रमण, डा. सुवंश ठाकुर ‘अकेला’, सूर्यकांत निराला, कुमार शर्मा ‘अनिल’ अपनी संवेदनात्मक उपस्थिति दर्ज कराती है। आलेख स्तंभ में ‘मंदार-दर्शन’ , पद्मा धर्म-पत्नी थी, कोसी-शोध साहित्य संदर्भ, आधुनिक हिन्दी लेखकन के क्रमशः लेखन- संजीव रंजन, अनन्त, देवेन्द्र कुमार देवेश व अनिरूद्ध सिन्हा की उपस्थिति पाठकों को अच्छी लगेगी। कविताएँ, गीत, गज़ल की उपस्थिति भी अच्छी है। आशा विश्वास, स्नेहलता, डा. लीला रानी ‘शबनम’, डा. भूपेन्द्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’, वासुदेव प्रसाद विधाता की कविताएँ और गज़लें बिम्बों की अन्तश्चेतनाओं की पूरी परत खोलने में पाठकों को साथ कर लेती हैं। उत्तम केशरी की अंगिका कविता की शुरूआत अच्छी है। अंचल की अन्य भाषाओं पर भी कविताएँ आनी चाहि; जैसे सूर्यापुरी, बंगला, मैथिली और उर्दू आदि।
    लघु कथाएँ, हास्य-व्यंग्य, आध्यात्मिक आलेख, बालदीप, दूर-दर्शन, सिनेमा स्तंभ की रचनाएँ भी पाठकों को आकर्षित करने में सक्षम है। इस अंक का महत्वपूर्ण पाठ- प्रबुद्ध लेखक इन्दुशेखर की है जिन्होंने चन्द्र किशोर जायसवाल के उपन्यास ‘पलटनिया’ पर अपनी पूरी गंभीरता और पारदर्शिता से विमर्श प्रस्तुत किया है।... सांवली का आवरण भी ‘सांवली’ की तरह मनमोहक है।
संपादकः डा. सुवंश ठाकुर ‘अकेला’, सिपाही टोला, चूनापुर रोड, पूर्णिया-854301. मोबाइल- 9973264550./ 9931465695.
 

सोमवार

’कोसी की नई जमीन' बनने को तैयार !


'कोसी की नई जमीन' का कविता खंड अब मुद्रण के लिए तैयार है। इसमें कोसी अंचल के 45 कवियों की कविताऍं संगृहीत हैं।
कोसी अंचल के युवा कवियों के समक्ष अपने अंचल के पूर्वज लेखकों की रचनात्मक विरासत और प्रतिमान हैं, वहीं दूसरी ओर आंचलिकता की विशिष्ट साहित्यधारा की जन्मभूमि होने के नाते विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित उनकि लोकधर्मिता और कोसी की त्रासदी की प्रेरणा और प्रभाव है- वरिष्ट साहित्यकार विश्वनाथ प्रसाद तिवारी का यह मानना है कि आज के बाजारवाद लोकतंत्र में मिटते आदमी और चालाक सत्ता के शोषक रूप की तस्वीर भी इनमें प्रयाप्त है!
 संग्रह में शामिल कुल 45 कवियों के नाम इस प्रकार हैं -
कटिहार (13)- अनिमेष गौतम (बोकारो), आकाश कुमार (दिल्‍ली), कल्लोल चक्रवर्ती (दिल्‍ली), देवेन्द्र कुमार देवेश (दिल्‍ली), राकेश रोहित (कोलकाता), विभुराज चौधरी (दिल्‍ली), शेखर सुमन (बंगलूरु), संजीव कुमार सिंह, संजीव ठाकुर (गाजियाबाद), स्वर्णलता ‘विश्वफूल’, स्मिता झा (चाईंबासा), हरे राम सिंह, सुरेन्‍द्र कुमार सुपौल (12)- अखिल आनंद (सहरसा), अनुप्रिया (दिल्‍ली), कनुप्रिया (दिल्‍ली), किसलय ठाकुर (मुंबई), कुमार सौरभ (दिल्‍ली), नीरज कुमार (दिल्‍ली), पंकज चौधरी (मेरठ), मिथिलेश कुमार राय (सहरसा), रंजीत (रॉंची), रमण कुमार सिंह (दिल्‍ली), श्याम चैतन्य (गुड़गॉंव), राजेश चंद्र (दिल्‍ली) मधेपुरा (7)- अनुपम कुमार (दिल्‍ली), अमरदीप (पटना), अरविन्द श्रीवास्तव, उल्लास मुखर्जी, कृष्णमोहन झा (सिलचर), राजर्षि अरुण (शिमला), संजय कुमार सिंह (किशनगंज) पूर्णिया (7)- अरुण प्रकाश, गिरीन्द्रनाथ झा (कानपुर), रणविजय सिंह सत्यकेतु (इलाहाबाद), श्रीधर करुणानिधि (पटना), विनीत उत्‍पल (दिल्‍ली), अशोक कुमार 'आलोक', सुरेन्‍द्र कुमार 'सुमन' सहरसा (3)- अरुणाभ सौरभ (गुवाहाटी), आलोक रंजन (दिल्‍ली), शुभेश कर्ण (पटना)
अररिया (3)- चेतना वर्मा (जमशेदपुर), ठाकुर शंकर कुमार, मिथिलेश आदित्‍य
कोसी की नई जमीन: कविता खंड, संपादक: देवेन्‍द्र कुमार देवेश ( मोबाइल- 09868456153.), प्रकाशक - यश पब्‍लिकेशंस, नई दिल्‍ली।