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सोमवार

केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री हरीश रावत ने किया ‘अमर शहीद मुंशी साह‘ का लोकार्पण

ई दिल्ली, वयोवृ़द्ध स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिक, सामाजिक कार्यकर्ता श्री नरेश पोद्दार द्वारा लिखित पुस्तक ‘अमर शहीद मुंशी साह‘ का लोकार्पण माननीय केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री हरीश रावत, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, उद्योग और संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने 22 फरवरी 2012 को अपने आवास पर किया। यह पुस्तक 1942 की अगस्त क्रांति में भागलपुर (बिहार) में शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानी मुंशी साह की संक्षिप्त जीवनी प्रस्तुत करने के साथ-साथ उत्तरी बिहार में तत्कालीन स्वतंत्रता-संग्राम संबंधी गतिविधियों का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत करती है। इस अवसर पर सर्वश्री सुरेश पोद्दार, कैप्टन रामफूल शर्मा, डा. कमलेश कुमार, ओमप्रकाश पोद्दार, प्रणव प्रसाद पोद्दार और पुस्तक के लेखक श्री नरेश पोद्दार उपस्थित थे।

गुरुवार

दिल्ली के मंच पर मधेपुरा की गूंज


ई दिल्ली. कोसी की मिट्टी की ताकत सिर्फ बाढ़ लाने और विभीषिका तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी मिट्टी में रचनात्मकता भी है. पिछले दिनों दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित गणतंत्र दिवस काव्य उत्सव में कोसी की माटी के शब्द राष्ट्रीय राजधानी में गूंजे. मधेपुरा के गाँव आनंदपुरा में पले-बढे युवा कवि विनीत उत्पल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उस मंच से अपनी कविताओं का पाठ किया, जिस मंच पर इनके अलावा मैथिली और भोजपुरी के करीब बीस कवि मौजूद थे. उन्होंने काव्य उत्सव के खुले मंच से 'बेटी' नामक कविता पेश की जो कोसी में आई विभीषिका और मां को लेकर था.
मैथिली और भोजपुरी में काव्य उत्सव का आयोजन दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी अकादेमी ने किया था. दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्रीराम भारतीय कला केंद्र में आयोजित इस काव्य उत्सव का उद्घाटन दिल्ली सरकार में भाषा, महिला और बल विकास मंत्री डा. किरण वालिया ने किया था. मैथिली में कविता पाठ करने वालों में विनीत उत्पल के अलावा मानवर्धन कंठ, अग्निपुष्प, कुमार राधारमण, शेफालिका वर्मा, रामलोचन ठाकुर, विवेकानंद ठाकुर, और रवींद्र लाल दास थे, वहीं भोजपुरी में अनिल ओझा 'नीरद', कमलेश राय, परिचय दास, अविनाश, रचना योगेश, रवींद्र श्रीवास्तव जुगानी, मनोज भावुक, तारकेश्वर मिश्र राही, ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, रमाशंकर श्रीवास्तव ने अपनी कविता पेश की.
 विनीत उत्पल का जन्म पूर्णिया जिले के सुखसेना ग्राम में हुआ है और उनका पैत्रिक ग्राम मधेपुरा के उदाकिशुनगंज प्रखंड के आनंदपुरा ग्राम है. उनका शुरूआती बचपन सैनिक स्कूल, तिलैया में बीता. उनकी पढाई-लिखाई मुंगेर जिले के तारापुर और रणग्राम में हुई है. उन्होंने भागलपुर स्थित मारवाड़ी कालेज में पढाई की है और तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की है. बाद में उन्होंने दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया से जनसंचार और भारतीय विद्या भवन से अंग्रेजी में पत्रकारिता की डिग्री ली. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर की डिग्री भी हासिल की है. हिंदी, अंग्रेजी और मैथिली में विपुल लेखन करने वाले विनीत की एक मैथिली कविता संग्रह 'हम पुछैत छी'' दिल्ली से प्रकाशित हुई है. उन्होंने साहित्य अकादमी से पुरस्कृत वरिष्ठ साहित्यकार उदयप्रकाश की कहानी मोहनदास का मैथिली अनुवाद भी किया है. विनीत उत्पल मारवाड़ी कालेज, भागलपुर के गणित विभाग के पूर्व अध्यक्ष और गणितज्ञ डा. वेदानन्द झा के सुपुत्र हैं.

मंगलवार

सहरसा में बाल श्रमिक उन्मूलन एवं विभिन्न श्रम अधिनियमों का एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित


हरसा। सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के पार्श्व में आयोजित बाल श्रमिक उन्मूलन एवं विभिन्न श्रम अधिनियमों का एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता कोसी अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ ने की कार्यक्रम में सहरसा जिले के प्रखण्ड प्रमुख एवं मुखिया बहुलांश में उपस्थित थे। कार्यक्रम का आरंभ करते हुए डा. अरविन्द श्रीवास्तव ने कवि राजेश जोशी की कविता ‘बच्चे काम पर जा रहे हैं’ शीर्षक से की उन्होंने कहा कि बच्चों का सुबह होतेे ही काम पर जाना किसी भी राष्ट्र का पतनावस्था की ओर ले जाने का द्योतक है उन्हें खेलने, तितलियों के साथ दौड़ने तथा पाठशाला व मदरसों में पढ़ने का सुनहरा अवसर प्रदान किया जाय जिससे वे राष्ट्र का कर्णधार बन सकें।
    समारोह में श्रमप्रवर्तन पदाधिकारी साीता राम मंडल, श्यामल किशोर सिंह, लक्ष्मी प्रसाद, प्रफुल्ल कूमार दास एवं पूनम लता सिन्हा ने बाल श्रम उन्मूलन कानून की व्याख्या करते हुए उपस्थित प्रमुख एवं मुखिया से अपेक्षित सहयोग करने की अपील की । जिला मुखिया संध के अध्यक्ष डा. प्राण मोहन सिंह, मुखिया गजेन्द्र नारायण यादव, मुखिया जयशंकर जी ‘पप्पु’, मुखिया राजेश कुमार ‘रजनीश’ ने  बाल श्रम उन्मूलन पर अपने-अपने विचार रखे। अधिवक्ता श्री जैन ने बाल श्रम पर संवैधानिक प्रावधानों की जानकारी दी। बचपन बचाओ आन्दोलन के निदेशक घूरन महतो एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार सिंह ने इस क्षेत्र में हुई उपलब्धि का विवरण प्रस्तुत किया। अध्यक्ष ने सभी उपस्थित श्रोताओं से अपील की कि जिस जलपान गृह अथवा होटल में बाल श्रमिक पाये जाय वहाँ जलपान अथवा भोजन न करेने का संकल्प लें तथा उस संस्था में उपस्थित बाल मजदूरों की सूचना संवद्ध अधिकारियों को त्वरित दें। सहायक श्रमायुक्त डा. आनन्द ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यशाला का समापन किया।

रविवार

शिवनेश्वरी बाबू हमेशा अपने कर्मों में जीते रहेंगे - डा. रवि

विधि विशेषज्ञ, साहित्यकार एवं समाजिक सरोकार में गहरी अभिरूचि रखने वाले तथा हिन्दी को न्यायालय में प्रतिष्ठापित करने वाले पूर्व लोक अभियोजक व वरीय अधिवक्ता शिवनेश्वरी प्रसाद के निधन से मर्माहत साहित्यकारों एवं अधिवक्ताओं ने कौशिकी क्षेत्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अम्बिका सभागार में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ ने कहा कि उनका ‘सोवियत रूस में 14 दिन’ यात्रा विषयक उल्लेखनीय ग्रंथ है तथा ‘समाजिक न्याय के द्वंद’ उनके स्वतंत्र चिंतन का प्रमाणिक दस्तावेज, श्री शलभ ने उन्हें अपना मित्र, दार्शनिक व मार्गदर्शक कहा।
    सम्मेलन के सचिव भूपेन्द्र नारायण यादव ‘मधेपुरी’ ने कहा कि वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी तथा दया, करुणा व ममता की मूरत थे। डा. मधेपुरी ने उन्हें साहित्य समर्पित साधक बताते हुए कहा कि न्यायालयों में हिन्दी को प्रतिष्ठापित करने वाले उस महानायक के सतत प्रयासों को मधेपुरा सदा याद करेगा।
    इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं मंडल विश्वविधालय के संस्थापक कुलपति डा. रमेन्द्र कुमार यादव ‘रवि’ ने उनके जीवन वृत की विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि ‘सदा हँसने वाले दादा श्री शिवनेश्वरी प्रसाद वर्षों में नहीं बल्कि हमेशा अपने कर्मों में जीते रहेंगे। इस अवसर पर पूर्व प्रतिकुलपति डा. के. के. मंडल, कुलानुशासक डा. एच. के. मंडल, प्राचार्या शांति यादव, प्राचार्य प्रो. सच्चिदानंद, प्रो. श्यामल किशोर यादव, डा. आर. क.े पी. रमण एवं डा. रामचन्द्र प्रसाद यादव आदि ने विस्तार से शोकोदगार व्यक्त किये।
    श्रद्धांजलि सभा में बुद्धिजीवियों एवं छात्रों की काफी उपस्थिति रही अधिवक्ता जवाहर झा, दिलीप झा, इंदूवाला सिन्हा, दशरथ सिंह, डा. विनय चैधरी, डा. रामेश्वर प्रसाद, डा. सुरेश भूषण, उल्लास मुखर्जी, सिद्धेश्वर काश्यप, इप्टा सचिव सुभाष चन्द्र एवं तुलसी पब्लिक स्कूल के निदेशक श्यामल कुमार प्रमुख थे। कार्यक्रम का संचालन डा. मधेपुरी एवं धन्यवाद डा. आलोक कुमार ने किया।