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शुक्रवार

‘कोशी तीर के आलोक पुरूष’ एक खोजपूर्ण साहित्यक अवदान - सुधाकर


‘कोशी तीर के आलोक पुरूष’ कोशी के संवेदनशील, बहुचर्चित तथा स्थापित साहित्यकार, कई गवेष्णात्मक साहित्य के रचयिता एवं साहित्य के पुरोधा श्री हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ का सद्यः प्रकाशित ग्रन्थ है। इसके पूर्व ‘मधेपुरा के स्वाधीनता आन्दोलन का इतिहास, ‘शैवअवधारणा और सिंहेश्वर’, ‘मंत्रद्रष्टा ऋष्यशृंग’ तथा ‘कोशी अंचल की अनमोल धरोहर’ एवं ‘अंग लिपि का इतिहास’ जैसे खोजपूर्ण साहित्य अवदान, शलभजी साहित्य’जगत को दे चुके हैं। इन ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक ग्रन्थों के पश्चात ‘कोशी तीर के आलोक पुरूष ’ नामक यह अनमोल ग्रन्थ, शलभजी का समीक्षार्थ सामने है, जिसमें संत शिरोमणि परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी, संत कवि जाॅन क्रिश्चन, पुलकित लाल दास ‘मधुर’, बलेन्द्र नारायण ठाकुर ‘विप्लव’, मो. कुदरतुल्लाह कालमी, कमलेश्वरी प्रसाद मंडल तथा कार्तिक प्र0 सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर गवेष्णात्मक एवं खोजपूर्ण प्रकाश डाला गया है।
    विद्वान लेखक ने अपने ‘दो शब्द’ में लिखा है कि ‘इसके अलावा भी इस क्षेत्र में ऐसे कई पुरूष-रत्न हुए हैं, जिन्हें अब तक प्रकाश में नहीं लाया जा सका है। कोशी अंचल के इतिहास एवं सांस्कृति के अनुसंधाता एवं रचनाकार के लिए यह अपराध बोध जैसा लगता है। मैंने तद्विषयक अपने पूर्व ग्रन्थ, ‘कोशी अंचल की अनमोल धरोहरें तथा प्रस्तुत ग्रन्थ ‘कोशी तीर के आलोक पुरूष’ में इससे उबरने का लघु प्रयास भर किया है। मेरा यह प्रयास कितना सफल है, सुधी पाठक ही निर्णय ले सकते हैं। इस परिपेक्ष्य में मेरा यह मानना है कि ‘कोशी तीर के आलोक पुरूष’ नामक यह ग्रन्थ ऐसे आलोक पुरूष को आलोकित तथा प्रोद्भाषित करने में सक्षम है, जिन्हें यह जमाना भुलाने की चेष्टा कर रहा है।
    आलोच्य ग्रन्थ बहुत ही ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक रत्नों को उजागर करने वाला है। तदर्थ , साहित्य-जगत् में ऐसे गवेष्णात्मक तथा ऐतिहासिक ग्रन्थ का अभिनन्दन होना चाहिए।
पुस्तक की छपाई तथा बंधाई बहुत आकर्षक तथा नयनाभिराम है।  
लेखकः  श्री हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’, अशेष मार्ग, लक्ष्मीपुर मुहल्ला, मधेपुरा (बिहार),पिन-852113
प्रकाशक- समीक्षा प्रकाशन, जे.के. मार्केट, छोटी कल्याणी, मुजफ्फरपुर (बिहार) मूल्य- 150/-रूपये
समीक्षकः सुबोध कुमार ‘सुधाकर’ , सम्पादक, ‘क्षणदा’ (त्रैमासिक)
    प्रभा प्रकाशन, त्रिवेणीगंज (सुपौल) बिहार, पिन-852139