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मंगलवार

जलद घिरे आकाश - सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक



ह सुबोध कुमार सुधाकर (सं.- क्षणदा) की त्वरित प्रकाशित पुस्तक है। इसमें 25 भिन्न-भिन्न शीर्षकों में दोहा विधा में लिखी गयी कविताएँ है कवि सुबोध कोसी अंचल के एक वरिष्ठ गीतकार हैं और इनके अनेक गीत ग्रंथ प्रकाशित होकर पाठकों में समादृत हो चुके हैं।
कवि की विपुल सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं ‘जलद घिरे आकाश’ के दोहे।इनमें मानवीय जीवन के नवीन मूल्यों की लाक्षणिक भाषा में अभिव्यक्ति हुई है। इनमें व्यक्त आध्यात्मिक अनुभूति, मानवतावादी विचारधारा तथा वैयक्तिक चिंतन और मार्मिक अनुभूति, प्रकृति का मानवीकरण तथा सौंदर्य चित्रण पाठकों को सहज ही आकर्षित कर लेते है। कवि की निजी अनुभूतियों का व्यक्तीकरण जहाँ- जहाँ प्रकृति के माध्यम से किया गया है वह बड़ा ही सजीव, सटीक और सार्थक है। इस दोहाकार ने प्रकृति की प्रत्येक विस्मयोत्पादक छवि को सामान्य पाठकों के लिए सरल, सुगम्य एवं सुबोध बना दिया है। इन दोहों में केवल प्रकृति का सौन्दर्य ही नहीं है- तीखा व्यंग्य है, युगबोध भी है और युगधर्म हुंकारता है। - हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ 

सम्पर्कः- सुबोध कुमार ‘सुधाकर’
संपादकः ‘क्षणदा’ (त्रैमासिक),
प्रभा प्रकाशन, त्रिवेणीगंज - 852139़, सुपौल (बिहार)
मोबाइल- 09430633647. फोन- 06477 220126